radhey krishna
सभी लोग कहते हे कि भगवान को 56 भोग का प्रसाद अर्पित करना चाहिए
क्या कोई मुझे बताएगा कि ये 56 भोग ही क्यों होते हैं 54 क्यों नहीं 55 क्यों नहीं और 57 क्यों नही.
चलो आज हम आप सब बताते हे की ये 56 प्रकार एक व्यंजनों का ही भगवान को भोग क्यों लगाया जाता है
शास्त्रों में लिखा हे की 33 करोड़ देवी-देवता होते हे और 84 लाख मनुष्य योनियाँ होती है।
ये तो सभी जानते होंगे।
ये जानने के लिए हम अंक गर्ित का सहारा लेते है।
कुल देवी-देवता = 330000000
कुल योनियाँ = 8400000
अगर 33 करोड़ में से हम 84 लाख घटा दे तो हमारे पास = 321600000 ये बचता हे
और भगवान हमें जीवन केवल 1 देता है
अब हम जो संख्या हमारे पास बचती हे उसमे से हम 1 घटा दे तो हमारे पास = 321599999 ये बचता है
अब हम इन सब को आपस में जोड़ देते हे. = 3+2+1+5+9+9+9+9+9 = 56
330000000
- 8400000
= 321600000
- 1
= 321599999
=> (3+2+1+5+9+9+9+9+9) = 56
तो इस प्रकार 56 भोगों का उदभव् हुआ।
कई विद्वानों और पंडितों को सायद ये सब नहीं पता होगा।
जिन्हे नहीं पता हो उन्हें अब बता देना।
सभी लोग कहते हे कि भगवान को 56 भोग का प्रसाद अर्पित करना चाहिए
क्या कोई मुझे बताएगा कि ये 56 भोग ही क्यों होते हैं 54 क्यों नहीं 55 क्यों नहीं और 57 क्यों नही.
चलो आज हम आप सब बताते हे की ये 56 प्रकार एक व्यंजनों का ही भगवान को भोग क्यों लगाया जाता है
शास्त्रों में लिखा हे की 33 करोड़ देवी-देवता होते हे और 84 लाख मनुष्य योनियाँ होती है।
ये तो सभी जानते होंगे।
ये जानने के लिए हम अंक गर्ित का सहारा लेते है।
कुल देवी-देवता = 330000000
कुल योनियाँ = 8400000
अगर 33 करोड़ में से हम 84 लाख घटा दे तो हमारे पास = 321600000 ये बचता हे
और भगवान हमें जीवन केवल 1 देता है
अब हम जो संख्या हमारे पास बचती हे उसमे से हम 1 घटा दे तो हमारे पास = 321599999 ये बचता है
अब हम इन सब को आपस में जोड़ देते हे. = 3+2+1+5+9+9+9+9+9 = 56
330000000
- 8400000
= 321600000
- 1
= 321599999
=> (3+2+1+5+9+9+9+9+9) = 56
तो इस प्रकार 56 भोगों का उदभव् हुआ।
कई विद्वानों और पंडितों को सायद ये सब नहीं पता होगा।
जिन्हे नहीं पता हो उन्हें अब बता देना।